यूरोप के सेब – उच्च गुणवत्ता वाले सेब

यूरोप में नया कृषि - तकनीकी फल कृषि में परिवर्तन कैसे करती है?

फलों की खेती यूरोपीय कृषि के मुख्य शाखों में से एक है. इस के साथ इस को बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ता हैं जैसे काम की बढ़ती लागतें, गुणवत्ता से सम्बंधित बढ़ती आवश्यकताएँ, बदलता हुआ जलवायु या संसाधनों का संतुलित प्रबंधन की आवश्यकता. इन को पूरी करने के लिए यूरोपीय फल उत्पादक अधिक अक्सर विक्सित तकनीकी तथा उपकरणों का उपयोग करते हैं जिन की मदद से उत्पादन की क्षमता तथा प्रभावशीलता एवं फसल की गुणवत्ता बढ़ जाती हैं और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम किया जाता है.

फलों की खेती में सटीक कृषि

सटीक कृषि यूरोपीय फलोद्यानों में – पोलिश फलोद्यान सहित – अधिक अक्सर उपस्थित है.
सब से बड़े यूरोपीय फलोद्यान में यानी पोलिश सेबों के केंद्र में निगरानी एवं खेती प्रबंधन की नवीन तकनीकी सामान्य हो जाते हैं. सॅटॅलाइट एवं जी.पी.एस प्रणालियों के उपयोग से फल उत्पादक पेड़ों की दशा का विश्लेषण कर सकते हैं और सटीक संचालन की मदद से – जैसे पानी या फसल संरक्षण उपाय – संसाधनों की बचत करने के साथ फसल बढ़ाए जा सकते हैं.

जी.पी.एस प्रणालियों का उपयोग नए बाग़ स्थापित करने के समय किया जाता है खास तौर पर अनियमित आकार के खेतों के मामले में. सटीक स्थिति निर्धारण मचान बनाने और ओलारोधी जाल लगाने में मदद देता है एवं बाद में फलोद्यान की देखभाल से सम्बंधित कार्यों को अधिक जल्दी बनाता है. अगर पेड़ों की पंक्तियाँ पूरी तरह बराबर हैं तो काम करने की चौड़ाई स्थाई हो सकती है जिससे छिड़काव, कटाई तथा अन्य देखभाल कार्य अधिक जल्दी किये जा सकते हैं. इस के आलावा मिटटी का नशा सीमित है क्योंकि ट्रेक्टर निश्चित सडकों पर चलते हैं.

अधिक बार यूरोपीय फलोद्यानों के ऊपर ड्रोन दिखाई देते हैं. इन का प्रयोग खेतों के प्रतिचित्रण, पेड़ों की रोपाई की योजना बनाने, खाद बिखेरने, सटीक छिड़काव तथा खेतों की निगरानी के लिए किया जाता है. ड्रोनों की मदद से भी रोगों और नाशीजीवों का पता लगाना ज़्यादा जल्दी किया जा सकता है जो अक्सर ज़मीं के स्तर पर दिखाई नहीं देते. इससे प्रतिक्रिया जल्दी और क्षति कम की जा सकती है.

फलों की खेती में वस्तु अंतरजाल (IoT)

आज के फलोद्यानों में सेंसरों और नियंत्रकों की प्रणाली अधिक अक्सर शामिल हैं जो वस्तु अंतरजाल बनाती  हैं. इससे फल उत्पादकों से पेड़ों तथा पर्यावरणीय परिस्थितियों की निगरानी वास्तविक समय में किया जा सकता है. पेड़ों के बीच सेंसर मुख्य विशेषताएँ जैसे वायु तापमान, मिटटी की नमी, आतपन, पत्तों की नमी या हवा की गति मापते हैं.

वस्तु अंतरजाल की मदद से फलोद्यान की निगरानी निरंतर एवं स्वचालित है और फलोद्यान एक आत्मा विनियमित प्रकृति पारितंत्र जैसे बन जाता है जो पर्यावरण में परिवर्तन पर प्रतिक्रिया करता है. डेटा एकत्रण एवं सामान्य कार्य स्वचालित हो जाने से फल उत्पादक पर कम ज़िम्मेदारियाँ होने के कारन वह जानकारी के विश्लेषण तथा महत्त्वपूर्ण निश्चय बनाने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है.

स्मार्ट सिंचाई और फर्टिगेशन प्रणालियाँ

पानी सेबों की फसल का उत्पादन एवं गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ते हुए मुख्य कारकों में से एक है. इसलिए अधिक से अधिक यूरोपीय फलोद्यानों में स्मार्ट सिंचाई प्रणालियों का प्रयोग किया जाता है. पारम्परिक सिंचाई प्रणाली की जगह मिट्टी की नमी सेंसरों से जो पेड़ो के नीचे मिट्टी की नमी मापते हैं और एकीकृत मौसम स्टेशन से डेटा चलाई ड्रिप-सिंचाई प्रणालियाँ का उपयोग किया जाता है.

सिंचाई प्रणालियाँ अक्सर फर्टिगेशन से जुड़ी हुई हैं यानी पानी के साथ खाद लगाई जाती है. इससे खाद में घाटा बहुत छोटी हो जाती है क्योंकि पोषण तत्व धूल नहीं जाकर सीधे जड़ों तक पहुँचते हैं. इस के नतीजे सेब पेड़ अधिक स्वस्थ हैं और पानी एवं खाद का उपयोग कम.

नवीन फसल संरक्षण उपाय

बिमारियों तथा नाशीजीवों से पेड़ों का संरक्षण फल खेती में सब से बड़ी चुनौतियों में से एक है. नवीन तकनीकी का उपयोग से फसल संरक्षण उपाय सटीक रूप से लगाए जा सकते हैं – छिड़काव की मात्रा और तरफ की नियंत्रण प्रणालियों की मदद से – जिससे इन उपायों का उपयोग एवं पर्यावरण पर प्रभाव कम हो जाते हैं.

जैविक पौधे संरक्षण उपाय अधिक लोकप्रिय भी बन जाते हैं जिन में लाभदायक सजीवों का प्रयोग किया जाता है जैसे सोनपंखी या नियोसेलियस क्यूक्यूमेरिस(Neoseiulus cucumeris( जो लाल मकड़ी दीमक और एफिड मिटा देते हैं. ये उपाय पर्यावरण के अनुकूल है और पारिस्थितिक उत्पादन को महत्त्व देते हुए फल उत्पादकों से अधिक बार चुने जाते हैं.

फसल इकट्ठा करने की मशीनीकरण एवं स्वचालन

नवीन फलोद्यानो ऐसे मशीनों में निवेश लगते हैं जिन से फल इकट्ठा करना अधिक आसान हो जाता है. लेकिन मशीनों के प्रयोग से खास तौर पर औद्योगिक सेब इकट्ठा किए जा सकते हैं जो प्रसंस्करण के लिए उगाए जाते हैं. सेब हार्वेस्टर काम अधिक जल्दी और किफायती बनाता है तथा उस के प्रयोग से फलों की घाटा छोटी हो जाती है.

डिजर्ट सेबों को जो उदहारण के लिए भारत में ग्राहकों तक पहुँचते हैं अभी तक हाथों से इकट्ठा किया जाता है. फिर भी यहाँ भी तकनीकी फल उत्पादकों को सहायता देती है – किसी खास प्लैटफार्म की मदद से फल इकट्ठा करना अधिक आसान है और स्वचालित सॉर्टिंग और पैकिंग लाइनों के प्रयोग से फल निर्यात के लिए अधिक जल्दी तैयार बन जाते हैं. इससे सेब गुणवत्ता के सख्त मानक पूरे करते हैं और पूरी दुनिया के बाज़ारों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकते हैं.

फलों की खेती में नवीन तकनीकी फसल की उच्च गुणवत्ता की गारंटी हैं

नवीन तकनीकी के उपयोग के कारण यूरोपीय फल उत्पादकों को नए मौके मिलते हैं. सटीक कृषि, स्मार्ट सिंचाई प्रणालियाँ, सल इकट्ठा करने का स्वचालन, नवीन पौधे संरक्षण उपाय और वस्तु अंतरजाल की मदद से यूरोपीय फल खेती अधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल बन जाती है.

सब से नवीन, पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों में निवेश करना यूरोपीय फल खेती की सफलता के लिए सब से महत्त्वपूर्ण बात है जो उत्पादित फलों की उच्च गुणवत्ता की गारंटी देती है.
इसी वजह से यूरोपीय सेब बहुत देशों से आयातकर्ताओं से अधिक ख़रीदे जाते हैं और इन की सम्मानित भारतीय बाजार में स्थिति बेहतर हो जाती है.

अगर आप को यूरोपीय सेबों के बारे में अधिक जानकारी चाहिए, हम से संपर्क करें: https://applesfromeurope.eu/contact/