अभियानों के बारे में
सं 2024-2027 में पोलिश फल उत्पादक संघ से चलाता हुआ “एशिया में यूरोप से सेब का समय” सूचना-विज्ञापन अभियान “यूरोप से सेब का समय” के अभियान का दूसरा भाग है. इस का मुख्य लक्ष्य उच्च गुणवत्ता के यूरोपीय पोलिश सहित फलों का प्रसार है और इन का दक्षिण पूर्व एशिया के बाज़ारों खास तौर पर भारत और वियतनाम के लिए निर्यात बढ़ाना.
संतुलित विकास के नियमों के अनुसार उत्पादित फलों पर केंद्रित होकर यह कार्यक्रम व्यापक रूप से व्यापारी लक्ष्य पारिस्थितिक पहलूओं से जोड़ता है. ऐसे खेती उपायों के जलवायु पर सकारात्मक प्रभाव पर ज़ोर देना आज की वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों के सामने बहुत महत्त्वपूर्ण हो जा रहा है. व्यवस्था की सफलता में मदद अलग अलग विज्ञापन कार्यक्रम देते हैं जिन में शामिल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनों में उपस्थिति और प्रस्तुतियाँ तथा सोशल मीडिया में गतिशील विज्ञापन अभियान भी हैं. इससे एशियाई आयातकर्ताओं और ग्राहकों को यूरोपीय फल खेती के खास गुण पहचान लेने का मौका मिलता है.
हालाँकि यह मालूम है कि सेब की अलग अलग किस्मों के स्वाद बहुत भिन्न हैं – जिस का एक अच्छा उदाहरण खट्टा ग्लॉस्टर और प्राकृतिक रूप से मीठा चैंपियन की तुलना है – फिर भी एक ही किस्म के सेबों के स्वादों में कभी कभी अंतर हो सकता है. लेकिन यूरोपीय संघ से सेबों के मामले में उपभोक्ताओं को आशा हो सकती है कि फलों का स्वाद दोहराए और स्थाई हो जो फल के हर दंश में एक ही उच्च गुणवत्ता मिलने की गारंटी देता है.
यूरोपीय संघ जिस में मुख्य उत्पादक और निर्यातकर्ता क्रमानुसार पोलैंड, इटली, फ्रांसके और जर्मनी हैं, गर्व से अपने सब से अच्छी फल खेती की परम्पराएँ साझाता है. यूरोपीय उपादकों की सब से बड़ी महत्त्वाकांक्षा भारत और वियतनाम के निवासियों को न केवल स्वादिष्ट और सुरक्षित बल्कि पर्यावरण के अनुसार उगाए फलों तक पहुँच का प्रदान करना है.
अभी यूरोपीय संघ के सब से बड़ा उत्पादक और निर्यातकर्ता क्रमानुसार पोलैंड, इटली, फ्रांस एवं जर्मनी हैं. यूरोपीय संघ को अपने फलों के स्वाद पर गर्व है और यह इन्हें भारत और वियतनाम के साथ बांटना चाहता है ताकि उन देशों के निवासियों को स्वादिष्ट, सुरक्षित एवं संतुलित विकास के नियमों के अनुसार उत्पादित सेबों तक पहुँच मिले.