यूरोपीय सेब भारत के बढ़ते हुए फल बाजार में सफल हैं
भारत के लिए सेब निर्यात बढ़ता जा रहा है. यह देश यूरोपीय संघ के सेब निर्यातकर्ताओं के लिए एक मुख्य बाजार बन जाता है. कोविड-१९ महामारी के बाद भारतीय लोगों की ताज़े सेबों में रूचि बढ़ी[1]. इस प्रवृत्ति का कारण बढ़ती हुई स्वास्थ्य के बारे में जानकारी एवं उपभोक्ताओं के बढ़ते आय हैं.
जहाँ तक सेब निर्यात की बात है, भारत तीसरे स्थान पर है – इस के आगे जर्मनी और ग्रेट ब्रिटैन हैं. यूएसडीए (अमेरिकी कृषि विभाग) के डेटा के अनुसार सं 2024 में भारत के लिए सेब का आयात पिछले साल की तुलना में 70% बड़ा था और यह 5,19,652 टन तक पहुँच गया. यह बढ़ाव अन्य बातों के अलबवा स्वस्थ उत्पादों की बढ़ती हुई आवश्यकता तथा उत्तर भारत से देश के दूसरे भागों के लिए देशी सेब पहुँचाने में अवसंरचना प्रतिबंधों के कारण है.
यू.एन कॉमट्रेड के अनुसार सं 2024 में भारतीय ताज़े सेब के आयात का मूल्य 41.7 करोड़ डॉलर से अधिक था. मुख्य आपूर्तिकर्ताओं में शामिल ईरान, टर्की, दक्षिण अफ़्रीका गणराज्य, पोलैंड और इटली और फ्रांस थे.
सीजन 2024/2025 में यूरोपीय संघ से भारत के लिए सेब निर्यात 41,260 टन था जिससे 21,142 टन पोलैंड से और लगभग 16,323 टन इटली से थे. सेब के अन्य आपूर्तिकर्ता जर्मनी और फ्रांस हैं.

इयू से भारत के लिए सेब का निर्यात. स्रोत: Apples trade
यूरोपीय सेब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक क्यों हैं?
भारतीय बाजार में सेब दूसरे फलों से अधिक स्वस्थ माने जाते हैं. इस का कारण तो है. एक लोकप्रिय कहावत के अनुसार “रोज़ एक सेब खाओ, डॉक्टर को दूर भगाओ”. सेब रोज़ खाना अच्छे स्वभाव के लिए पर्याप्त हो सकता है और जीवन अधिक लम्बा भी कर सकता है [2]. ताज़े, कुरकुरे यूरोपीय सेब भारत और दुनिया भर के अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत उपभोक्ताओं के लिए एक उचित स्नैक हैं.
भारतीय उपभोक्ता अधिक अक्सर उच्च गुणवत्ता, प्राकृतिक, उच्च सुरक्षा मानक पूरे करते हुए आयातित प्रीमियम उत्पाद ढूंढते हैं. यूरोपीय सेब जैसे रेड डिलीशियस, गाला, ग्रैनी स्मिथ, रॉयल गाला या फ़ूजी और हनीगोल्ड इन ज़रूरतों को पूरे करते हैं. आकर्षक रंग और आकार तथा फलों की लम्बी दृढ़ता के कारण ये सेब माँगों से भरे ग्राहकों के लिए बहुत अच्छा विकल्प है.
यूरोपीय सेबों का एक खास गुण यह है कि यूरोपीय उत्पादक प्राकृतिक पर्यावरण की चिंता करते हुए और फसल संरक्षण उपायों का उपयोग कम करते हुए उत्पादन के संतुलित उपायों पर ध्यान देते हैं. भारतीय उपभोक्ता पारिस्थितिक ढंग से उत्पादित प्राकृतिक सेब ढूंढते हैं एवं उन की प्रशंसा करते हैं.
आयातकर्ताओं और वितरकों के लिए लाभ
देशी आयातकर्ता और वितरक यूरोपीय सेबों का भारत के लिए आयात से बहुत सारे लाभ उठाते हैं. देशी ग्राहकों को यह पसंद है कि लम्बे समय के वितरण के बावजूद सेबों का स्वाद ऐसा है जैसे ये अभी पेड़ से इकट्ठा हुए हैं. भण्डारण, लपेटने एवं वितरण के नवीन उपायों के कारण यूरोपीय सेब भारत के लिए तथा भारतीय उपमहाद्वीप की यात्रा के दौरान लमबे समय के लिए ताज़े रहते हैं.
प्रस्ताव में यूरोपीय सेब की उपस्थिति दुकानों एवं फल वितरकों को अतिरिक्त मूल्य दे सकती है जिससे वे प्रीमियम उत्पाद ढूंढते हुए ग्राहकों को आकर्षित करें.
इयू-भारत का सहयोग दोनों पक्षों के लिए लाभदायक
भारत में उच्च गुणवत्ता के फलों की मांग से यूरोपीय सेब निर्यातकर्ताओं के लिए कुछ नई सम्भावनाएँ उत्पन्न हो जाती हैं. स्वाद, आकार एवं स्वास्थ्य के लिए लाभ के कारण यूरोपीय सेब प्रीमियम उत्पाद ढूंढते हुए उपभोक्ताओं की आवश्यकताएँ पूरी करते हैं. यूरोपीय उत्पादकों से सहयोग भारत के आयातकर्ताओं तथा वितरकों को ग्राहकों की संतुष्टि एवं वित्तीय परिणामों से सम्बंधित लाभ पहुंचा सकता है.
आपको यूरोपीय सेबों के बारे में अधिक जानकारी चाहिए? संपर्क करें: https://applesfromeurope.eu/hi/home-form-hi/
[1] https://indusfood.co.in/article/indias-apple-industry/
[2] https://www.frontiersin.org/journals/nutrition/articles/10.3389/fnut.2024.1471737/full