सेब मिस्र और जॉर्डन के साथ-साथ भारत और वियतनाम को निर्यात करता है
भारत के लिए निर्यात
यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार संबंध कृषि क्षेत्र में 2003 से दो मुख्य अनुबंधों से नियंत्रित हैं: सेवा व्यापार समझौता और निवेश समझौता. इन समझौतों पर आर्थिक सहयोग आधारित है जो कई सालों के दौरान धीरे धीरे विकसित हो गया है. आसियान-भारत (AIFTA) मुक्त व्यापार क्षेत्र भी उल्लेख करने लायक है जिस में शामिल माल व्यापार समझौता है जो ईयू और भारत के बीच आर्थिक संबंध का एक और महत्त्वपूर्ण भाग है. जनवरी 2026 में मुक्त व्यापार समझौता (FTA) क बारे में बातचीतें सफलता से ख़त्म हुईं. इस समझौते की मदद से यूरोपीय उत्पादकों को सब से बड़ी आबादी वाले (लगभग 150 करोड़ लोग) देश और दुनिया की चौथी सब से बड़ी अर्थव्यवस्था तक विशेषाधिकृत पहुँच मिलेगा. भारत से व्यापर समझौता के कारण आज के ईयू से निर्यात किये कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों पर ऊँचे सीमा शुल्क कम हो जाएंगे. भारत और ईयू अभी एक भौगोलिक उपदर्शन और निवेश संरक्षण अनुबंध से सम्बंधित समझौता तैयार करते जा रहे हैं.
ईयू और भारत के बिच व्यापार का मूल्य सं 2024 में 120 अरब यूरो था (सं 2019 में 78 अरब यूरोप से वृद्धि). ईयू भारत का दूसरा सब से बड़ा व्यापार साझेदार है (चीन के बाद). पिछले दस सालों में ईयू से भारत के लिए निर्यात 58 % बढ़ गया[1]
सं 2025 में भारत दुनिया में ताज़े सेबों के आयात के क्षेत्र में दूसरे स्थान पर था और पहले स्थान पर जर्मनी था. आयात की कुल मात्रा 4,78,299 टन थी जिस का अर्थ यह है कि 2024 की तुलना में यह 8% गिर गया. वैश्विक सेब आयात में भारत का हिस्सा 6.7% तक पहुँच गया जो इसी बाजार का दुनिया भर से निर्यातकर्ताओं पर बढ़ता प्रभाव साबित करता है[2].
सीजन 2024/2025 में यूरोपीय संघ से कुल निर्यात भारत के लिए 51,818 टन सेब था
और अभी 2025/2026 सीजन में – 89 099 टन
सीजन 2024/2025 में ईयू सदस्य देशों में से सब से बड़े आपूर्तिकर्ता थे:
– पोलैंड – 40,027 टन,
– इटली – 34,045 टन,
– फ्रांस – 7,636 टन[3].
पोलैंड जो इयू से पहुँचाए सेबों की आधी मात्रा से अधिक के लिए ज़िम्मेदार है यूरोपीय संघ से भारत के लिए मुख्य सेब निर्यातकर्ता की स्थिति रखी. ये डेटा साबित करते हैं की भारतीय बाजार यूरोपीय संघ के – और खास तौर पर पोलिश – सेब उत्पादकों के लिए निर्यात की मुख्य दिशाओं में से एक रहता है.
[1]https://www.consilium.europa.eu/pl/infographics/eu-india-trade-facts-and-figures/
[2]https://circabc.europa.eu/ui/group/a6df5bd5-efdf-40cc-a42d-8292eedd0201/library/f805b268-4637-4370-8ba8-66a199735cda/details?open=true
[3]https://agridata.ec.europa.eu/extensions/DashboardApples/ApplesTrade.html
वियतनाम के लिए निर्यात
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यूरोपीय संघ और वियतनाम के बीच व्यापार संबंध कृषि क्षेत्र में 12 फरवरी 2020 से अधिक महत्त्वपूर्ण बन गया है जब मुक्त व्यापार समझौता और निवेश संरक्षण समझौता समाप्त किए गए थे ये महत्त्वपूर्ण समझौते 1 अगस्त 2020 को लागू हुए हैं और इन के साथ बहुत बड़े परिवर्तन भी हुए – दोनों पक्षों के बीच लगभग सब सीमा शुल्क हटाए गए[1]. इससे ईयू और वियतनाम के बीच व्यापार ने नई गतिशीलता प्राप्त की. ये समझौते सिर्फ न्यायिक शिष्टाचार नहीं बल्कि एक असली साधन हैं जिन से दोनों क्षेत्रों के अर्थव्यवस्थाएँ बढ़ती जा रही हैं. उन के उद्देश्य न केवल वाणिज्यिक आदान-प्रदान बढ़ाना बल्कि संतुलित विकास का समर्थन देना और दीर्घकालीन आर्थिक लाभ लाना भी है. इस के परिणाम वियतनाम दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (ASEAN) में ईयू का दूसरा सब से बड़ा व्यापार साझीदार बन गया और इस के आगे सिर्फ सिंगापुर है. वियतनाम माल व्यापार के क्षेत्र में यूरोपीय संघ का 14वां सब से बड़ा व्यापार साझेदार और आसियान के क्षेत्र में सब से बड़ा व्यापार साझेदार है. सं 2025 में कुल व्यापारिक आदान-प्रदान का मूल्य 76 अरब यूरो था जिससे वियतनाम से इयू के लिए आयात 63.9 अरब यूरो और इयू से वियतनाम के लिए निर्यात 12.2 अरब यूरो था[2]. ताज़े फल के मामले में, यूरोपीय संघ से वियतनाम के लिए निर्यात सीजन 2024/2025 में 11,030 टन था और अभी के सीजन 2025/2026 में 8323 टन. फ्रांस जिसने सीजन 2024/2025 में 8946 टन पहुँचे यूरोपीय संघ का मुख्य निर्यातकर्ता जारी रहा और पोलैंड ने वियतनाम के लिए 1426 टन सेब का निर्यात किया[3]. |
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[1]https://trade.ec.europa.eu/access-to-markets/pl/content/umowa-o-wolnym-handlu-miedzy-ue-wietnamem
[2]https://policy.trade.ec.europa.eu/eu-trade-relationships-country-and-region/countries-and-regions/viet-nam_en?prefLang=pl&etrans=pl
[3]https://agridata.ec.europa.eu/extensions/DashboardApples/ApplesTrade.html#