यूरोप के सेब – उच्च गुणवत्ता वाले सेब

भारत और वियतनाम के बाज़ारों में खास सम्मानित सेब की किस्में

एशियाई बाज़ारों में यूरोपीय सेबों में रूचि बढ़ती जा रही है. भारत और वियतनाम सेब के आयात के ग्लोबल लीडरों में शामिल हैं और उपभोक्ताओं को न केवल इयू के सब से ऊँचे खाद्य सुरक्षा मानक पूरे करती हुई उच्च गुणवत्ता बल्कि फलों का अनुपम स्वाद भी आकर्षित करता है.

अमीर बनते जा रहे भारत और वियतनाम के समाज, खाने की बदलती आदतें इन करणों की वजह प्रीमियम आयातित सेबों की मांग जल्दी बढ़ती जा रही है. उच्च गुणवत्ता और उत्पादन के स्थान में रूचि के आलावा दोनों देशों के निवासियों की प्राकृतिक, प्रदूषण एवं कीटनाशकों से मुक्त सेबों में रूचि बढ़ती जा रही है. उत्पादन के सख्त मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण एवं पर्यावरण पर ध्यान देने के कारण भारत और वियतनाम में उपभोक्ता निश्चित हो सकते हैं कि यूरोपीय सेब चुनकर उनको प्रीमियम फल मिलें.

प्रीमियम सेब को क्या शर्तें पूरी करनी पड़ती है ? क्योंकि दोनों भारत और वियतनाम में ग्राहक सेब चुनने समय खास तौर पर उन के आकार पर ध्यान देते हैं – मुख्य बातें रंग, चमक एवं एक समान रूप हैं. भारत में लाल, मीठे और कुरकुरे सेब ज़्यादा पसंद हैं और वियतनाम हल्का, मीठा, थोड़ा खट्टा स्वाद के सेब की किस्में, दो रंग की सहित, अधिक लोकप्रिय बन जाती हैं.

चलो देखें यूरोप से आयातित सेब की क्या क्या किस्में भारत और वियतनाम में सब से सम्मानित हैं:

रेड डिलीशियस

एक पारम्परिक किस्म जो दोनों बाज़ारों में लंबे समय से उपस्थित है – आरम्भ में संयुक्त राज्य अमेरिका से, आजकल यूरोप से भी आयातित है. उस का शंकु आकार, गहरे लाल रंग और कोमल, मीठा गुदा दोनों देशो के उपभोक्ताओं को पसंद है. खास तौर पर बहुत चमकीले फल जो रसट नहीं है सम्मानित हैं.

गाला

यह एक सब से विशिष्ट एवं सम्मानित किस्मों में से एक है. इस के आकर्षक धारीदार आकार एवं कोमल मीठा स्वाद की प्रशंसा की जाती है. फलों के अच्छे आकार के कारण गाला सेब बच्चे वाले परिवारों से अक्सर चुना जाता है. भारतीय बाजार में गहरे लाल के परिवर्तन सफल हैं. वियतनाम में उपभोक्ता व्यक्तिगत या प्रीमियम पैकेज में लपेटे सेब अक्सर चुनते हैं.

ग्रैनी स्मिथ

हरे रंग की किस्म जिस का स्वाद खास तौर पर खट्टा और तीखा है. यह विशेषकर जवान उपभोक्ताओं के बीच और पाक कला में (जूस, सजावट, सलाद) लोकप्रिय है. इस का गहरा रंग और कुरकुरापन आकर्षक हैं.

दोनों बाज़ारों में फ़ूजी सेब भी सम्मानित हैं. फिर भी यह मौलिक रूप से  जापान से है यह किस्म भारत में बहुत लोकप्रिय बन गई. यह बहुत मीठा, रसदार, सुगन्धित सेब है. अपनी कठोरता एवं भण्डारण के लम्ब्वे समय के कारण यह थोक व्यापार तथा नवीन खुदरा व्यापार में सम्मानित है.

व्यापार एवं संभार तंत्र से सम्बंधित टिप्पणियां

दोनों देशों में उपभोक्ता पैकजे पर बहुत ध्यान देते हैं – रूप, संतुलित ढंग से और पर्यावरण के अनुकूल कागज़ में लपेटना, स्वाभाविक तरीके से सड़नशील लेबल. उत्पादन के देश के बारे में जानकारी एवं स्पष्ट लेबल भी महत्त्वपूर्ण हैं. आयातकर्ताओं की दृष्टि से प्रदान की स्थिरता, आकार का मानकीकरण तथा सॉर्टिंग की उच्च गुणवत्ता मुख्य बातें हैं.

भारत और वियतनाम के बाजार दोनों मौसमी हैं – सब से ऊँची मांग शरद-शिशिर के महीनों में है (नवंबर-फरवरी) जब एशिया में उत्पादन सीमित है. उस समय यूरोपीय सेब उत्तर और दक्षिण अमेरिका तथा ईरान से ताज़े सेबों के साथ प्रतिस्पर्ध्दा कर सकते हैं.

इयू से आयातकर्ताओं के लिए संभावनाएं

दोनों देशों के सेब बाजार में एक खास परिवर्तन हो रहा है. जनसांख्यिकीय परिवर्तन, जीवनशैली में बदलाव, बढ़ते हुए आय इन सब के कारण भारत और वियतनाम में उपभोग बढ़ता जा रहा है. दोनों बाज़ारों में स्वास्थ्य के लिए महत्त्वपूर्ण उत्पादों पर केंद्रित जलवायु एवं पर्यावरण की रक्षा करते हुए संतुलित ढंग से उत्पादित अच्छे विकल्प की ओर परिवर्तन हो रहा है. “एशिया में यूरोप से सेब का समय” अभियान भारत और वियतनाम में ग्राहकों के लिए उच्च गुणवत्ता, सुरक्षित और मीठे यूरोपीय सेब पहचान लेने एवं उन का अनुभव करने का मौका देता है.