यूरोप के सेब – उच्च गुणवत्ता वाले सेब

असाधारण रूप से ठंडी मई - क्या यूरोपीय फलोद्यानों में ठंड सेब के निर्यात पर असर डालेगा ?

मई पौधों की तेज़ वृद्धि का महीना है लेकिन कभी कभी इस में अपेक्षित गर्मी नहीं आती है. इस साल का वसंत ने – और खास तौर पर मई – यूरोप के बहुत प्रदेशों के फलोद्यानों में बहुत नुकसान पहुंचाए. लेकिन क्या प्रतिकूल मौसम यूरोप में सेबों के उत्पाद और निर्यात पर अत्यधिक प्रभाव पड़ेगा?

क्या निर्यात खतरे में पड़ सकता है?

सर्दियाँ अधिक अक्सर हलकी होती हैं जिन के बाद अचानक बहुत ठंडा पड़ जाता है या लम्बे समय के लिए ठण्ड,तेज़ हवा और बारिश होती जा रही है (या बारिश नहीं है) या मई में बर्फ पड़ता है. अस्थाई मौसम के कारण इस साल में यूरोप में विशेषकर इटली, ग्रीस, हंगरी या बुल्गारिया में सेब और चेरी या खूबानी अधिक पीड़ित थे.

पोलिश मुख्य सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार फलोद्यानों में पेड़ों की स्थिति सर्दी के बाद ठीक है. हालाँकि बारिश की कमी तथा अप्रैल और मई की शुरुआत में ठण्ड ने फूलों और नए फलों को हानि पहुंचाई. क्षतियाँ सेब पेड़ों में जो अप्रैल के दूसरे भाग में ही खिल रहे थे दिखाई देती हैं. बाद में ठंड आ गया और फूल एवं नए फल नष्ट किये. फूलों को रास बनाने के लिए समय नहीं था, इन का परागण नहीं किया गया और इसलिए प्राइमोर्डियम गिरे. क्षतियाँ चेरी और जंगली चेरी के फलोद्यानों में दिखाई देती हैं.

– पोलैंड में अप्रैल और मई में मौसम ने सब फल पौधों में बड़ी हानियाँ पहुंचाईं. सब से पीड़ित चेरी और जंगली चेरी के पेड़ हैं. अफ़सोस की बात वायुमंडलीय परिस्थितियों ने हमारे सेब के उत्पादन पर प्रभाव भी डाला लेकिन सौभाग्य से सब किस्मों पर नहीं – पोलिश फल उत्पादक संघ का अध्यक्ष मिरोस्लाव मालीशेव्स्की कहता है. – यूरोपीय फलोद्यान ऐसी घटनाओं के लिए अधिक अच्छी तरह तैयार हो जाते हैं. बहुत साल से हम नवीन ठंडारोधी प्रणालियों जैसे पौधों पर पानी डालना या फलोद्यानों को गरम करना का प्रयोग करते हैं जिससे मौसम का प्रभाव कम किया जाता है. किसी जगह में उत्पादन में कुछ क्षति होने के बावजूद भी सेब निर्यात से कोई समस्या अपेक्षित नहीं है – मिरोस्लाव मालीशेव्स्की बताता है. – यूरोप के कृषि प्रदेश विभिन्न हैं और भण्डारण के नवीन तकनीकी से प्रदान की स्थिरता साल भर रखी जा सकती है.

प्रदान में समस्या का खतरा छोटा है

सेब इकट्ठा करने के समय के आरम्भ तक अभी कुछ समय बाकी है और फसल की गुणवत्ता और मात्रा का मूल्याङ्कन अगस्त या सितम्बर से पहले नहीं किया जा सकेगा. लेकिन अभी मालूम है कि ठण्ड का प्रभाव सब फसलों और सब किस्मों पर नहीं पड़ा, अन्य के बीच ये फसल बच गए जिन्होंने पिछले सीजन में फल उत्पन्न नहीं किए. यह नए सीजन के लिए एक अच्छा पूर्वानुमान है जिस के अनुसार यह माना जा सकता है कि सेब निर्यात में बड़ी समस्याओं का जोखिम छोटा होने वाला है. नए सीजन तक इयू आतंरिक बाजार में और तीसरे देशों के बाज़ारों के लिए आपूर्ति में सेब की माँग शीत भण्डार में रखे फलों से पूरी की जाएगी.

न सिर्फ मई की मौसम की विसंगतियाँ बल्कि बदलता जा रहा जलवायु यूरोपीय उद्यान कृषि के लिए चुनौती तो है. इसलिए अधिक फल उत्पादक फलोद्यानों के नवीकरण करने या उगाई हुई किस्में नई किस्मों के लिए बदलने का निश्चय करते हैं – दोनों ये जो अधिक लोकप्रिय हैं जिन की उत्पादकता एवं गुणवत्ता अधिक ऊँची हैं और ये जो बिमारियों या जलवायु में बदलावों के लिए प्रतिरोधी हैं. फलोद्यानों में आम तौर पर फलोद्यानों की सुरक्षा की नवीन प्रणालियों का प्रयोग किया जाता है जिससे नकारात्मक मौसम परिस्थितियों या बिमारियों के प्रति प्रतिक्रिया जल्दी की जा सकती है. यह सब दिखाता है कि यूरोपीय फल उत्पादक बहुत मेहनत करते हैं ताकि भारत और वियतनाम के बाज़ारों में उच्च गुणवत्ता और अनुपम स्वाद के, मांग से अधिक भरे हुए ग्राहकों की आवश्यकताएँ पूरी करते हुए सेब पहुँचाए जाएँ.

अंत में एक बहुत महत्त्वपूर्ण बात जो वितरणों की निरंतरता निश्चित करने पर प्रभाव डालता है. यह भारत और वियतनाम के आयातकर्ताओं से मौजूदा गहरा सहयोग और ठेकेदारों की अपने आप को बाजार की बदलती हुई परिस्थितियों से अनुकूल बनाने की लचीलापन. इसी सहयोग से भारतीय और वियतनामी ग्राहक यूरोपीय सेबों का मज़ा उठा सकते हैं.